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Haadse

Rs.200/-
Description :
" इस आत्मकथा को स्त्री के अपने चुनाव की कहानी भी कहा जा सकता है। पटियाला के बड़े मिलिटरी अफसर की जिद्दी और अपने मन का करने वाली लड़की जो अपनी हरकतों से बार-बार बाप और उनके परिवार को असुविधाओं में डालती है, खुली मीटिंगों में उनके सामन्ती दुमुँहेपन पर प्रहार करती है, विभाजन की त्रासदी झेलती मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ बनकर जवाब माँगती है और फिर अपने मन से क्षत्रिय (राजपूत) परिवार छोड़कर (गुप्ता) से शादी करके बिहार (झारखण्ड समेत) चली आती है। यहाँ आकर पति से विद्रोह करके मजदूरों-कामगारों के बीच उनके संघर्ष का जीवन चुनती है। इस आत्मकथा को सामन्तवाद और लोकतंत्रा के खुले द्वन्द्व की तरह भी पढ़ा जा सकता है। इन्हीं तूफानी झंझाबातों से गुजरकर आई है रमणिका गुप्ता। आर्य समाज, कांगे्रस, समाजवादी और कम्युनिस्ट होने के नाटकीय मोड़ों का इतिहास भी है और विकास भी। "
Format :
HB
ISBN No. :
978-81-8361-002-5

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