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Istri Netikta Ka Talibanikaran

Rs.300/-
Description :
" दलित स्त्रियों के सामाजिक शोषण का कोई अंत नहीं है। वे जाति के नाम पर, महिला के नाम पर, मजदूरी के नाम पर, सुंदरता के नाम पर कभी भी अपमानित और बलात्कृत हो सकती हैं। ऊंची जाति की नफरत, हिंसा, उत्पीड़न, अत्याचार और क्रूरता की शिकार सर्वाधिक दलित स्त्रिया ही होती हैं। आखिर इस नैतिकता की परिधि क्या है? नैतिकता के बंधन का तालिबानी फतवा सिर्फ औरतों के लिए ही क्यों? नैतिकता सिर्फ विवाह और सेक्स के लिए ही क्यों? दिन-रात खटती स्त्री के श्रम के लिए नैतिकता क्यों नहीं? नैतिकता के तालिबानीकरण का फरमान पुरुषों के लिए क्यों नहीं? आज तक लोग औरतों को ‘फार ग्रांटेड’ ही लेते रहे हैं। इस पुस्तक में इसके विरुद्ध गुस्से का इज़हार दर्ज है। यह पुस्तक किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है बल्कि उस दूषित मानसिकता के खिलाफ है, जो स्त्री को अपना उपनिवेश मानने की सदियों पुरानी विचारधारा को पुष्ट करती है। इस तरह की स्त्री-विरोधी मानसिकता रखने वालों की हमारे समाज में कमी नहीं है। छद्म लोगों की भी एक बड़ी संख्या हमारे समाज और साहित्य में है। इसीलिए इस पुस्तक को स्त्री-विरोधी, बुद्ध और आम्बेडकर विरोधी मुहिम के प्रतिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। "
Format :
HB
ISBN No. :
978-81-89006-30-3

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