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Pratinidhi kavitayen

Rs.350/-
Description :
" स्त्री रचनाकारों के बारे में कह सकते हैं कि ‘पर्सनल इज़ पोलिटिकल’ पर रमणिका जी के यहां इसका विलोम सत्य है। ‘पोलिटिकल इज़ पर्सनल’ इन दोनों धु्रवान्तों के बीच इनकी कविताएं रोशनी का एक लक्ष्मण-झूला रचती हैं। पुल जो लोहे का है, लोहा जिसका स्वाद लोहार से नहीं, उस घोड़े से पूछना चाहिए, जिसके मुंह में लगाम है! लोहे का होने के बावजूद यह पुल मुलायम है! पालना झुलाता है! बचपन की याद दिलाता है, आदिम आवेगों की भी जो बचपन से ही ‘मुन्नी मारकर’ मन में सोए रहते हैं और कभी भी किसी क्षण जग सकते हैं! ...हर व्यस्त व्यक्ति थोड़ा-सा मस्त होता है, थोड़ा-सा अस्त और थोड़ा-सा अस्त-व्यस्त भी! रमणिका जी की कविताएं हिन्दी की ऐक्टिविस्ट स्त्री कविता की पहली पीढ़ी के कई रंग पूरे ठस्से से उज़ागर करती हैं। - अनामिका "
Format :
HB
ISBN No. :
841-903775-4-X

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