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Vimukt- ghumantu aadivasiyon ka mukt - sanghars

Rs.250/-
Description :
"स्वातंत्रयोत्तर भारत में विमुक्त-घुमन्तू आदिवासियों पर तरीके से विचार करने का प्रयास अब तक कम ही हुआ है। रमणिका गुप्ता ने इस जरूरी काम का बीड़ा इस पुस्तक को संपादित करते हुए गंभीरता से उठाया है। रमणिका जी का यह कहना सही है कि पृथ्वी और मनुष्य के अस्तित्व में आने के बाद मनुष्य घुमन्तू ही था। वही घुमन्तू आदिवासी कदम बढ़ाकर सभ्यता का निर्माण करते हुए आज विज्ञान, एटम, तकनीकी युग में आ पहुंचा है। वह आजाद था पर आज वह अपराधी होने का कलंक ढो रहा है। ये मूल निवासी हैं। आजाद हैं पर भारत देश में ये आज भी गुलाम हैं। न इन्हें आरक्षण मिला और न पूरी तरह भारतीय नागरिक माना गया। इस पिछड़े तबके पर रमणिका गुप्ता की सचेत दृष्टि ने अनेक खोजी व गम्भीर चिंतकों के आलेख यहां संकलित किए हैं। समेकित रूप में यह महत्वपूर्ण पुस्तक यह आवाज बुलंद करती है कि विमुक्त-घुमन्तुओं को अधिकार एक बदला हुआ समाज ही दे सकता है। यह एक ऐसा समाज होगा, जो पुरानी जकड़न छोड़ चुका हो। यह विचित्रा बात है कि आजादी का आंदोलन प्रारंभ करने वाले घुमन्तू कबीले ही आज गुलामी का जीवन जीने को विवश हैं। यह पुस्तक उस संवेदनहीनता को भी समाप्त करेगी, जिसके इन कबीलों के प्रति कोई सामाजिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी महसूस नहीं की जाती।"
Format :
HB
ISBN No. :
978-81-88457-89-2

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