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Bonek Bol

Rs.150/-
Description :

एखन झारखण्ड छेतरे सांसकिरतिक पुनर्जागरन के समइ चइल रहल हैं। भासा-साहित तो हेव हे कोन्हो संसकिरतिक बाहक-अभिव्यंजक, सइ लागिन झारखण्ड छेतरेक नवो भासा गुलांय साहितक प्राइ कम-बेसो सभे बिधांय लिखल जाइ रहल है। बोनेक बोल डोगल खोरठा कविताक गोछसंगरह आर सइ आन्दोलनेक एगो समत कड़ी। बोन जकर में सामिल रह है गाछ-मालो, टुंगरी-पहार, झरना पझना, चरइ-चुनगुनी, नाना रकमेक जीव-जंत, खुला-फादा आकास, अकासे गोटा-गोटी पंइरइक मुडराइत कार-कुदर आर बकुलाक पांइख झक चरक-सफेद बदरी, संगे-संगे बोन पतरांय बइसल-मांडल लोक। बोनेक लोक तो हेव हथ सरइ सखुआ लेखे सीधा-सोझ आर मन हेव हइन पहार लेखे ऊंचा। जिनगीक चाइल-ढाइल के मिलान बोनेक झरना-पझरा, नदी-नालाक उन्मुकता से करल जाइ पारे। कबि एक बटे आकासे उडइत बदरी के देइख के आकासे स्वछत उडेक चाहना करहे ई कबिक नैसर्गिक चाहना। दोसर बटे एगो दोसर कबिक पहार लेखे ऊंचा मन जाइत-पांइत, धरम- सम्प्रदाय, देस-परदेस, जनी-मरद के भिन-भेद के भाव से उपर उइठ के सोझे मानुस के बात करहे अधखेंचा-आधा मानुस के नॉय । ‘बोनेक बोल’ डोंगल खोरठा कविताक गोछसंग्रह आर सइ आन्दोलनेक एगो समत कड़ी। "

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