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SAMAY KE SATH

Rs.225/-
Description :
" समय के साथ’ पुस्तक में संकलित आलेख एवं टिप्पणियां साहित्य की सजग संवेदनशील नागरिकता का न केवल प्रमाण हैं बल्कि निरन्तर अपक्षरित होती बौद्धिक सजगता, जो काहिली और आलस्य के सुरक्षित कोनों में सिमट गई है का भी ठोस प्रत्याख्यान है। पूरी पुस्तक में रमणिका गुप्ता ने अपने समय और समाज के जरूरी प्रश्नों को जिस तरह विवेचित-विश्लेषित किया है, वह निस्संदेह आभासी वास्तविकता के धुंध के बीच वास्तविकता की रोशनी लेकर आता है, जिसके आलोक में गैर मुनासिब इरादों के साथ-साथ सत्ता, ज्ञान तथा तकनीक के भीषण गठजोड़ से उत्पन्न प्रति मानवीय षड्यंत्रों का खुलासा होता है। ‘ईराक का अर्थशास्त्र’ जैसे आलेख इसके गवाह हैं। पुस्तक के आलेख समकालीन विमर्शों की दुनिया के अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों से टकराते हैं। स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, जनजातीय समस्या, संगठनों की भूमिका, साम्प्रदायिकता, फासीवाद आदि विषयों पर उनकी पैनी निगहबान आंखें पर्याप्त रोशनी डालती हैं। लम्बे अर्से से रमणिका गुप्ता जिस तरह मुख्यधारा के बरक्स हाशिऐ के लोगों की समस्याओं और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही हैं, उसका पर्याप्त लेखा-जोखा इस पुस्तक में हमें दिखाई देता है। इसलिए इन्हें बहस के जरूरी मसौदे के रूप में भी देखा जा सकता है। इस पुस्तक से गुजरते हुए हम मुतमइन हो सकते हैं आज इस अराजक समय में विचारों एवं संघर्षों की भूमिका निष्प्रभावी नहीं है। अन्त में यह कहना मात्रा औपचारिकता ही होगी कि पुस्तक आम पाठकों, शोधार्थियों या इन विषयों में दिलचस्पी रखने वाले बुद्धिजीवियों के लिए बेहद उपयोगी होगी। अनिल त्रिपाठी "
Format :
HB
ISBN No. :
978-81-88077-52-6

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