Bhartiya Bhasha lok sarvekshan jharkhand ki bhashayen/भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण झारखण्ड की भाषाएँ

Rs.1675/-

Isbn: 978-81-250-5689-8

Writer: Ganesh en devi, Ramnika Gupta Prabhat Ku. Singh/गणेश एन देवी, रमणिका गुप्ता, प्रभात कु. सिंह

Year: 2015

"किसी समुदाय की भाषा के निर्माण में कई शताब्दियां गुजर जाती है है। मानव समुदायों द्वारा निर्मित सभीएं हमारी सामूहिक सांस्कृतिक धरोहर हैं। सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हमारे होते हुए उन्हें ‘विश्वव्यापी भाषासंहार’ का सामना न करना पड़े। इसीलिए यह निर्णय लिया गया कि भारत के लोगों का भाषा सर्वेक्षण किया जाए। प्रस्तुत खण्ड, झारखंड की गैर-अनुसूचित एवं वहां बोली जाने वाली अन्य बोलियों के संदर्भ में है। झारखंड की भाषाएं दो विभिन्न परिवारों से आती हैं आॅस्ट्रो एशियाटिक और द्रविड़। झारखंड की आदिवासी भाषाओं और बोलियों ने तो पिछले पांच हजार वर्षों की संस्कृति, इतिहास, आस्थाओं और विश्वासों को सुरक्षित ही नहीं बल्कि उन्हें संजोए भी रखा है। सदानों की भाषा में आर्यों के फैलाव और विस्तार की पगध्वनि के साथ-साथ जनजातियों व मूल निवासियों की मिली-जुली संस्कृति की भी जानकारी मिलती है। प्रस्तुत खण्ड में झारखण्ड की अंगिका, असुरी, कुड़माली, कुंडुख, कोरवा, खड़िया, खोरठा, गोंडी, नागपुरी, पंचपरगनिया, बिरजिया, बिरहोर, भूमिज, माव भाषा, मुंडारी, शबर, संताली वे हो भाषा जैसी सत्राह भाषाओं के सर्वेक्षण ब्योरे तैयार हुए हैं। इस खण्ड में इन भाषाओं का विस्तृत विवेचन उनके भाषा क्षेत्रा, तत्संबंधी भाषायी मानचित्रों, इतिहास, भाषा की विशेषताओं एवं उसके व्याकरण, साहित्य व शब्दवली के आधार पर किया गया है, साथ ही पाठकों एवं शोधार्थियों की सुविधा हेतु उदाहरणों व उद्धरणों का हिन्दी अनुवाद भी दिया गया है।"