Aadiwasi Swar aur Nayi Shataabdi/आदिवासी स्वर और नई शताब्दी

Rs.350/-

Isbn: 81-260-1700-7

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1998/2002

" आदिवासी जो अब तक लोककथात्मक चरित्रों, किंवदंतियों और मिथकीय परिकल्पनाओं के रूप में हमारी संवेदना को रंगते रहे हैं, अब वे पुरानी दास्तां हो चुके हैं। नई शताब्दी में आदिवासी स्वर की स्वाभाविकता और सहजता को सृजनात्मक संदर्भों में विकास और विस्थापन का दंश, आदिवासी संसाधनों और संस्कृति के साथ मनमाना व्यवहार, शोषण की निरंतरता, अशिक्षा और गरीबी और उससे उपजे असंतोष और प्रतिरोधी संघर्ष के संदर्भ विद्यमान हैं। पुस्तक में खड़िया, कुडुख, नागपुरिया, भिलोरी, मराठी, मुंडारी, संताली, बिरहोर, लम्बाड़ी के साथ कोंकर्णी, मलयाली, राजस्थानी और हल्बी से आदिवासियों द्वारा सृजित साहित्य को उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है। रमणिका गुप्ता द्वारा संपादित ‘आदिवासी स्वर और नई शताब्दी’ पुस्तक एक उम्दा कृति है। यह पुस्तक साहित्य में आदिवासी-विमर्श का नया दालान खोलती है। "