Bahu Juthayi/बहु जुठाई

Rs.225/-

Isbn: 978-81-906943-9-1

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1998/2010

" इस संग्रह मैं ग्यारह कहानियां हैं । खटने कमाने वाली औरतौं की ग्यारह कहानियां जो आदिवासी दलित हैं लेकिन ऊर्जा से भरी हैं। एक कहानी राजनैतिक महिला से संबंधित है। चिड़ियां कहानी, अकेलज्ञ महसूस करती एक महिला की संवेदना भरी कहानी है। इन कहानियों में प्यारी हो या चम्पा, जिरवा हो या ललिता या दारू बेचने वाली मंझियाइन सब की सब जीवतं हैं ये कहानियां एकदम यथार्थ से जुड़ी हैं ये सभी पात्र बिल्कुल साधारण सर्वहारा हैं लेकिन जुझारूपन में असाधारण। रमणिका जी की स्त्रियां आदिवासी दलित समाज की निबर्ल इकाइयां खटने कमाने वाली औरतें हैं जो व्यवस्था द्वारा लिखी इबारत को किसी ज्ञानी ध्यानी से ज्यादा गहराई से पढ़-बूझ जाती हैं। हिन्दी लेखिकाओं पर ‘काउच-लेखक’ के आरोप का करार जवाब देता, दलित-आदिवासियों के समाज-विज्ञान, नारियों के मनोविज्ञान तथा बिहार झारखण्ड के कोयलांचल के सामाजिक जीवन को हू-ब-हू उपस्थित करता यह संकलन साहित्य और समाज-विज्ञान दोनों की दृष्टि से अपरिहार्य पुस्तक सिद्ध होगा। "