Nanhe sapanon ka sukh/नन्हे सपनों का सुख

Rs.150/-

Isbn: 978-81-89022-006

Writer: Sarita badaik/सरिता बड़ाइक

Year: 2013

" सरिता सिंह बड़ाइक की कविता जीवन से भाषा तक की नयी खोज की तरह है। वे एक ऐसी ‘चीक बड़ाइक’ जनजाति से आती हैं, जिसकी अस्मिता ही नहीं अस्तित्व भी खतरे में है। सरिता हिंदी और नागपुरिया में लिखती हैं और अपनी पहचान के संकट और संघर्ष को लगातार अपनी कविता का विषय बनाती हैं। सरिता की कविता का संसार एक बिल्कुल ही नया संसार है। अछूती प्रकृति, अछूते मानवीय संबंध, अलग तरह के जीवन संघर्ष सब कुछ ऐसे हैं, जो शायद पहली बार कविता में आ रहे हैं। यह कहना बेमानी है कि सरिता की कविताओं में एक ताजगी है यह तो हर अच्छे नये कवि में होती है। यहाँ तो कविता की पूरी दुनिया ही नयी है, जिसके लिए हमें सरिता के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। "