Pahad Hilne Laga hai/पहाड़ हिलने लगा है

Rs.75/-

Isbn: 978-81-906943-2-2

Writer: Vahru sonvade anu Nishikant Thakaar /वाहरु सोनवणे, अनु.: निशिकांत ठकार

Year: 2009

"आज आदिवासी लेखकों की सृजनात्मक गतिविधियाँ ऊँचाइयाँ छूने के लिए गतिशील हैं। वाहरू सोनवणे महाराष्ट्र के आधुनिक कवियों की कड़ी के अग्रणी कवि हैं। उन्होंने अपनी भिलोरी भाषा के अलावा, मराठी में भी पर्याप्त कविताएँ लिखी हैं। वे मराठी के प्रतिष्ठित कवि हैं और भिलोरी की कविता का तो उन्हें जनक ही कहा जा सकता है। उनकी मराठी-भिलोरी कविताओं का पहला संग्रह ‘गोधड’ नाम से सन् 1987 में प्रकाशित हुआ था, जिसका हिन्दी अनुवाद ‘पहाड़ हिलने लगा है’ पुस्तक ‘गोधड’ की कविताओं। ‘गोधड’ के माध्यम से वाहरू सोनवणे ने जहाँ आदिवासी समाज की पीड़ादायक स्थितियों का वर्णन किया, वहीं समाज में आ रही चेतना को भी शब्द दिए हैं। इसका अनुवाद मराठी के मशहूर तथा प्रतिष्ठित लेखक एवं अनुवादक श्री निशिकांत ठकार ने किया है। रमणिका फाउंडेशन द्वारा देशभर के विभिन्न जनजातीय-नृजातीय समूहों की सृजनात्मकता को रेखांकित करने और उनके साहित्य को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से कई पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा है। यह पुस्तक उसी शृंखला की एक कड़ी है।"