Malsaama/मलसामा

Rs.250/-

Isbn: 978-93-80631-17-2

Writer: Khalkungi/खालकुंगी

.मलसामा उपन्यास एक धमर्परायण लडकी की कथा है जिसका जन्म आरै पालन फुलपुई मैं हुआ था। वह पाप से दूषित नहीं हुई थी। यह उपन्यास युद्ध के दौरान भोगे हुए यथार्थ के साथ-साथ मिजोरम के सामाजिक, धार्मिक व राजनैतिक संरचना पर भी प्रकाश डालती है। युद्ध का एक वर्णन देखें ”मैं जापानी कैद से भागकर आया हूं। एक कुकी, एक सिख और मुझे बंदी बना लिया था। उन्होंने हम तीनों को बेड़ियों से बांध दिया था। हम आराम के लिए कोहिमा में रुके थे। नीचे की तरफ खड़ी चट्टान थी। हम लोग भूखे थे। जो खाना उन्होंने हमें दिया वह पर्याप्त नहीं था। हमने दूध के डिब्बे में दांत गड़ाकर छेद किया और चुपचाप दूध चूस लिया। जब वे आराम के लिए रुके तो हमने मौका देखकर भागने का फैसला किया। हमने एक दूसरे को संकेत दिया दिया। सिख हमारे संकेतों को समझ नहीं पाया। मैं और कुकी जंजीर तोड़ कर चुपचाप सरक निकले और चट्टान से कूद गए। उन्होंने हम पर गोलियां चलाई, लेकिन निशाने पर नहीं लगीं। चोटी ज्यादा ऊंची नहीं थी। सौभाग्य से मैं आंवले के पेड़ों के झुरमुट पर गिरा। पर मुझे अपने दोस्त के बारे में कुछ नहीं मालूम। मैं वहां से नागाओं के एक छोटे से गांव गया और बाद में अपनी कंपनी में फिर शामिल हो गया। मुझे घर आने के लिए छुट्टी मिलती है।“ यह उपन्यास प्रतीक्षा कर रहा है कि आप इसे पढ़कर आनन्द ही नहीं लें बल्कि अजाने भारत के राज्य मिजोरम को भी जानें।