Ab Moorkh Nahi Banege Hum/अब मूरख नहीं बनेंगे हम

Rs.60/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1997

" दलित चेतना का साहित्य देश में अब उस स्थिति को प्राप्त कर चुका है, जहां उसे नकारा नहीं जा सकता। यह पुस्तक इसी सामयिक अनिवार्यता को निरुपित करती है। इस पुस्तक में सम्मिलित रचनाओं को देखने से यह साफ पता चलता है कि दलितों की पीड़ा की पर्तें एक दो नहीं, अनेक हैं। उन पर्तों को उघाड़े बिना उनके निजी संसार से रिश्ता कायम करना संभव नहीं। दलित साहित्य आंदोलन के मिजाज़ एवं उसकी दशा-दिशा को समझने में इस पुस्तक का प्रकाशन अपने आप में बिल्कुल अनूठा प्रयास है क्योंकि इसमें दलित साहित्य आंदोलन से जुड़े लगभग सभी उल्लेखनीय हिंदी भाषी कवियों की रचनाएं संकलित हैं। ये कविताएं दलितों की पीड़ा को ठीक से समझाने में सहायक होंगी। दलित चेतना के इतने सारे कवियों को एक जगह इकट्ठे पढ़ना एक अभूतपूर्व एहसास है। हिंदी में इस चेतना की यह पहला कविता-संग्रह है, जो एक मिशनरी जील की द्योतक है। "