Dalit Drishti/दलित दृष्टि

Rs.250/-

Isbn: 978-93-5000-726-6

Writer: Gail omvet,ANU: ramnika Gupta/ Akilkess/स.: गेल ओमवेट , अनु: रमणिका गुप्ता /अकील कैस

Year: 2011

" डॉ. अम्बेडकर ने दलित-दर्शन का मनोरथ निश्चित करते हुए यह दर्ज किया है कि ‘‘दर्शन शास्त्र का कार्य विश्व को पुनःनिर्मित करना है, न कि अपना समय यह बताने में ही बर्बाद करते जाना है कि यह संसार कैसे आरंभ हुआ।’’ भारत में आज मुख्यतः दो ही दर्शन आमने-सामने हैं एक तरफ मनु और नीत्से का सुपरमैन, नस्लवाद और ब्राह्मणवाद पर आधारित आध्यात्मवादी विभेदकारी दर्शन, तो दूसरी तरफ समता, भाईचारा और आजादी पर आधारित साम्यवादी, समाजवादी, फुले-आम्बेडकरवादी और बौद्ध-दर्शन। मनुष्य-केंद्रित सोच वाले इन दर्शनों का लक्ष्य एक ही है समता, भाईचारा और आजादी। इनका केंद्रबिन्दु है मनुष्य और उसका कल्याण। जहां संत-दर्शन में ‘ईश्वर की नज़र में मनुष्य बराबर हैं’ के भजनों से हटकर ‘मनुष्य मनुष्य की नज़र में बराबर हो’ की गंभीर और निश्चित चेतावनी से भरी आवाज़ ने ज़ोर पकड़ा, तो फ्रांस की क्रांति ने मनुष्य की आजादी, भाईचारे और बराबरी की बात की। डाॅ अम्बेडकर के दलित-मुक्ति संग्राम ने आम आदमी के समर्थक उस दूसरे दर्शन की धारा को मजबूत किया। ये ‘दलित दर्शन’ पुस्तक में मनुष्य केंद्रित दर्शन का विश्लेषण विभिन्न लेखकों द्वारा किया गया है। "