Gujrati Sahitya Me Dalit kalam/गुजराती साहित्य में दलित कलम

Rs.200/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 2001

" गुजराती साहित्य में दलित कलम’ पुस्तक के माध्यम से गुजराती दलित साहित्यकार हिन्दी जगत के रूबरू हैं। गुजराती दलित-चेतना भावना के स्तर पर हलचल मचाते हुए सवर्ण समाज के मुंह-दुंह होती है और भीतर तक मथ देती है सवर्ण समाज को भी और अपने दलित समाज को भी। वह आत्मालोचना को अपना हथियार बनाती है। उनके समालोचक, सार्थक आलोचना करते हुए दलित लेखकों के विकास में सहयोगी बने हैं। गुजराती दलित लेखन बिना धैर्य गंवाए विकट स्थितियों से जूझता है। वह आक्रामक नहीं होता। वह बड़ी लकीर खींच कर उससे बड़ा बनने की आकांक्षा रखता है। गुजराती कहानियां जहां पेशेगत जड़ता, दलितों की जातीय-समस्या, जन्मना भेदभाव, छुआछूत जैसी त्रासदी को उभारती हैं, वहीं वे उनकी बेरोजगारी, भूमिहीन, घर-विहीन होने के संकट अथवा उनके भीतर के अपने भेदभावों, कमजोरियों की पर भी विवेचना करती हैं। गुजराती में भोगे हुए अनुभवों की अभिव्यक्ति के लिए दलित लेखकों ने रेखाचित्र विधा का उपयोग भी बड़ी ही सफलता से किया है। गुजराती दलित साहित्यकार अभिजात लेखकों को कविता में बहुत पीछे छोड़ आया है। उसका फलक व्यापक है। "