Mal Mutra Dhota Bharat : Vichar ki kasauti par/मल मूत्र ढोता भारत : विचार की कसौटी पर

Rs.600/-

Isbn: 978-81-89918-40-8

Writer: Ramnika Gupta/susheela Takbhaure/रमणिका गुप्ता/सुशीला टाकभौरे

Year: 2009/2013

" यह पुस्तक ‘मल-मूत्र ढोता भारत: विचार की कसौटी पर’ एक आईना है, जिसमें भारतीय समाज की विकृत सोच का सच और सफाईकर्मियों जैसे तिरस्कृत समाज का दर्द दिखाने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक का लक्ष्य है मल-मूत्रा ढोने वाले जाति-समुदाय के लोगों में चेतना जगाना, उन्हें उनकी अस्मिता की पहचान और उनकी शारीरिक-मानसिक गुलामी का एहसास कराना और विषमतावादी, जातिवादी, मनुवादी ब्राह्मवाद से सावधान कराना। इस कौम के जाति से जुड़े उनके पैतृक पेशों व रोजगार के प्रति उनके मानस में असन्तोष और घृणा पैदा करके, उससे मुक्त करवा कर, उन्हें वैकल्पिक रोजगार से जोड़ना भी रमणिका फाउंडेशन का लक्ष्य है। इसलिए इस पुस्तक में सफाईकर्मी समुदाय की जातियों, उपजातियों का उद्भव, अस्पृश्यता, सफाई पेशे का उदय और वैकल्पिक रोजगार के मुद्दे केन्द्र में रखे गए हैं। सिर पर मैला ढोने की प्रथा की भंयकर स्थिति और उससे जुड़े कार्य को हमने मार्मिक अनुभव-कथनों, विचारपरक आलेखों, पुस्तक अंशों, रपटों और केस हिस्ट्री, वैचारिक लेख तथा आमने-सामने बहस के माध्यम से स्पष्ट करने का यत्न किया है। "