Mashalchi/मशालची

Rs.300/-

Isbn: 978-81-89918-28-6

Writer: Gurucharn singh rao Anu Dwarka Bharti/गुरुचरण सिंह राओ/ अनु द्वारका भारती

Year: 2009

" गुरुरचरण सिंह राओ / अनु. : द्वारका भारती पंजाब के एक दलित रविदासी परिवार में 1941 को जन्मे गुरुचरण सिंह राओ, जो हमारे बीच नहीं हैं के इस उपन्यास के आने से पहले पंजाब में लिखा जाने वाला प्रगतिवादी नाम से जाना जाने वाला साहित्य अधिकतर लघु व मंझोले किसानों की दुर्दशा पर ही केंद्रित था। इन छोटे किसानों के मुंह से गिरे दानों को लपक कर अपना पेट पालने वाला यह दलित खेतिहर-मजदूर, जो अति निम्न दशा में अपना जीवन जीने को अभिशप्त था, इस साहित्य के केंद्र में नहीं रहा। अपनी पीठ पर तमाम किस्म की कठिनाइयों का बोझ ढोता हुआ दलित इन पंजाबी लेखकों के एजेण्डे पर कभी नहीं देखा गया। प्रस्तुत उपन्यास, दलित-साहित्य की इस परिभाषा ‘दलित-साहित्यकार ही दलित साहित्य लिख सकता है’ को सार्थक करता हुआ पाठकों के समक्ष उपस्थित है। दलित-जीवन की तमाम संवेदनाओं को जिस सशक्त ढंग से इस उपन्यास में उतारा गया है, उसे साहित्य के क्षेत्रा में एक नई साहित्यिक उपलब्धि कहा जा सकता है। ग्रामीण दलित-जीवन की भयावह त्रासदियों और उनके ठेठ पंजाबी परिवेश को रुपायित करने वाला यह उपन्यास आज एक उदाहरण बन गया है। "