Punjabi Sahitya Me Dalit Kadam/पंजाबी साहित्य में दलित कदम

Rs.450/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 2002

" यह पुस्तक दलित चिंतन की संभावनाओं और सीमाओं का आईना भी बन गई है। पंजाबी के विविध पीढि़यों के रचनाकारों की कविताएं, कहानियां, उपन्यास एवं आत्मकथा अंश तथा संस्मरण और आलेख ही नहीं, साक्षात्कार भी इस दृष्टि से पहली बार एक साथ सामने आ पाए हैं कि आज के दलित साहित्य पर विचार करने का रास्ता बन सके। ‘पंजाबी साहित्य में दलित कदम’ रमणिका गुप्ता द्वारा विभिन्न भाषाओं के दलित साहित्य को हिंदी में प्रकाश में लाने के लिए ऐतिहासिक कदमों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम है
कमलेश्वर पंजाबी की इन दलित कहानियों में वहां के दुख-दर्द, संघर्ष और सपने जितने सबल ढंग से आए हैं वे प्रायः हिंदी की शहरी भाषा में नहीं आते। रमणिका गुप्ता द्वारा संपादित ‘पंजाबी साहित्य में दलित कदम’ संघर्षशील साहित्य को मुख्यधारा के समानान्तर खड़ा करने में बहुत बड़ा योगदान देता है।
राजेन्द्र यादव
‘पंजाबी साहित्य में दलित कदम’ पुस्तक के माध्यम से यह बतलाया गया है कि दलित आंदोलन एक अखिल भारतीय आंदोलन है।
मैनेजर पांडे
रचनाओं के साथ-साथ इसमें पर्याप्त विचारपरक और आलोचना केंद्रित सामग्री भी है।
महेश दर्पण
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