Stri vimarsh kalam aur kudal ke bahane/स्त्री विमर्श कलम और कुदाल के बहाने

Rs.200/-

Isbn: 81-87302-59-3

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 2004/2010

"इन पचास वर्षों में शहरों तथा कुछ हद तक ग्रामीण इलाकों में भी स्त्रिायाँ जागरूक हुई हैं। औरतों का शिक्षित होना भी विभिन्न क्षेत्रों में उनके विकास का कारण बना पर यह विकास केवल गुणात्मक विकास था, गणनात्मक नहीं। देश में प्रचलित धार्मिक कुरीतियों, विकृतियों, अंधविश्वासों व अशिक्षा और जागरूकता के अभाव के कारण नारी मुक्ति आन्दोलन केवल शहरों में उच्च-वर्ग की कतिपय स्त्रिायों तक ही सीमित होकर रह गया। मध्यम ग्रामीण क्षेत्रों में वह लगभग शून्य ही रहा है। इस पुस्तक में रमणिका जी ने स्त्राी-विमर्श को अलग ढंग से परिभाषित करते हुए एक नई व्याख्या दी है, जो मध्यम वर्गीय स्त्रिायों की मुक्ति अवधारणा से भिन्न है। वे खटने-कमाने वाली औरतों, मध्यम वर्गीय व ग्रामीण औरतों में जग रही मुक्ति-चेतना व उसके अभाव के कारणों को आर्थिक, सामाजिक व भौगोलिक दृष्टि से व्याख्यायित करती हैं। वे ऐसे कई प्रश्न उठाती हैं, जिन पर बहस की जरूरत है। इसलिए भी यह पुस्तक महत्वपूर्ण है।"