Hashiye Ulaanghti Aurat-2/हाशिये उलाँघति औरत-२

Rs.200/-

Isbn: 978-81-88080-51-9

Writer: Ramnika Gupta/Archan Verma /रमणिका गुप्ता/अर्चना वर्मा

Year: 2015

" रमणिका फाउंडेशन की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना के तहत देश की 40 भाषाओं एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं की महिला कथाकारों की कहानियों को सामने लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फाउंडेशन ने इस परियोजना के तहत हिंदी साहित्य की कथाकारों को ‘हाशिए उलांघती आरै त कहानी’ के नाम से तीन खण्डों में प्रकाशित किया है | इसे कोठी मैं धान, (जो आज नहीं हैं) खड़ी फसल (1947 के पहले जन्मीं व 1947 के बाद जन्मीं) और नई पौध (1964 के बाद जन्मीं) नामक खण्डों में बांटा गया है, जिसमें आजादी से पहले और 2013 तक की कथाकारों को शामिल किया गया है। इन खण्डों के जरिए स्त्री मुक्ति की आकांक्षा के क्रमागत विकास को दिखाने की कोशिश की गई है। खण्डों की कहानियों के जरिए पता चलता है कि स्त्री मुक्ति की आकांक्षा शनैः शनैः किस तरह से बलवती होती गई। लब्बोलुबाब यह कि स्त्री आज मर्द बनने की आकांक्षा नहीं पालती। वह अपने स्त्री होने की अपनी पहचान को सम्मानित व गौरवान्वित होते देखना चाहती है। वह आदर पाना चाहती है। प्यार पाना चाहती है। खुद प्यार करना चाहती है। समानता और सम्मान की अपेक्षा रखने लगी है अब स्त्री। खण्ड-2 में वे महिला कथाकार जो 1947 के बाद जन्मीं ‘खड़ी फसल’ के तहत शामिल हैं "