Kavita Ka Loktantra/कविता का लोकतंत्र

Rs.250/-

Isbn: 81-903775-3-1

Writer: Abhishek Kashyap/अभिषेक कश्यप

Year: 2008

" रमणिका गुप्ता की कविता में किसी भी क्षण, किसी भी तरह का फासला मौजूद दिखाई नहीं देता। ऐसा केवल इस कारण नहीं कि भाषा आवेग से थरथराती महसूस होती है; ऐसा इसलिए भी है कि प्रायः हर कविता में कोई ठोस वास्तविक अनुभव सामने मौजूद दिखाई देता है और देखने, महसूस करने के क्षण में ही कविता बनती या बिगड़ती दिखती है। ...ये कविताएं प्रायः किसी विकट अनुभव की कविताएं हैं।’ अर्चना वर्मा के अनुसार ये पंक्तियां तकरीबन 45 साल के लम्बे कालखंड में फैले एक दुर्धर्ष कवयित्री के बहुविध सृजनकर्म को देखने-समझने की कुंजी हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि रमणिका गुप्ता की कविताओं में जीवन के ठोस वास्तविक अनुभवों का विराट ऐश्वर्य मौजूद है। एक बहुलता और विविधता भरी जिंदगी को हम यहां निरंतर कविता में रिड्यूस होते देखते हैं। आशा है समग्र कविताओं के मूल्यांकन पर केन्द्रित यह पुस्तक लेखकों-पाठकों के साथ-साथ शोधार्थियों के लिए भी समान रूप से उपयोगी होगी। "