Khunte/खूंटे

Rs.200/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1988

" नारी मुक्ति का परचम लहराए ‘खूंटे’ कविता संकलन नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। लिखी कतिपय पंक्तियां द्रष्टव्य हैं- ‘मेरा ना कहने का अधिकार तो रहने दो मुझे।’ रमणिका जी ने कविताओं को जिया है। कविता के हरेक आखर में उनकी जिजीविषा के अंकुर फूटे हैं, हर पांत में उन्होंने अनथक यात्रा लिखी है और कोलन, सेमी- कोलन, विराम व पूर्ण-विराम में वे रुकी हैं थककर नहीं, शक्ति संजोने के लिए। वस्तुतः रमणिका गुप्ता की भावना उत्कट जिजीविषा से ओत-प्रोत है और यही कारण है कि वे हर निषेध को अस्वीकार करती हुई अपने चुने हुए लक्ष्य के संबंध में पूरी तरह आश्वस्त रह पाती हैं। कवयित्री स्त्री और पुरुष दोनों को समान मानती हैं इसलिए वे चाहती हैं कि उसकी देह पर उसका अधिकार हो जैसे पुरुष का अपनी देह पर होता है। दरअसल कवयित्री का मूल प्रेरणा बिंदु मनुष्य और मनुष्य के बीच हर तरह की बराबरी के संकल्प से जुड़ा हुआ है। परिवर्तन के लिए संघर्षरत् रहने के बावजूद रमणिका गुप्ता अपनी सहज मानवीय संवेदनशीलता को बचाने में समर्थ रही हैं। "