Me Aajad Hui Hu/में आजाद हुई हूँ

Rs.70/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1998

"स्त्री -विमर्श के प्रचलन के बहुत पहले से रमणिका गुप्ता अपनी रचनाओं में, विशेष रूप से कविताओं में स्त्री की पीड़ा और उससे उभरी हुई विक्षोभपूर्ण मानसिकता की अभिव्यक्ति करती रही हैं। स्त्री के भीतर एक ऐसी स्त्री रच दी गई है, जो उन्हीं गुणों को महत्व देती है, जो उसे पुरुष-प्रभुत्व से भरे हुए समाज ने सिखलाये हैं। यह निस्संदेह महत्वपूर्ण बात है कि रमणिका जी अपनी कविताओं में अपने भीतर की ऐसी स्त्री को मार चुकी हैं। यह कोई साध् ाारण उपलब्धि नहीं है। ये कविताएँ उस स्त्री के मुक्ति-गीत हैं, जो बाहर के दबावों और भीतर के तनावों को पूरी तरह अस्वीकार करती हुई अपनी नई अस्मिता के साथ खड़ी है। बड़ी बात यह है कि रमणिका गुप्ता तनावों-टकरावों को उलांघती हुईं उस स्थिति में जाने की उमंग से भरी हुई पहचान देती हैं, जिसमें मुक्ति या स्वतंत्राता का उत्सव मनाया जा सके। यह उनकी अनूठी उपलब्धि है। स्पष्ट है कि ये कविताएं एक लम्बी मानसिक-यात्रा के अर्थपूर्ण मोड़ों को प्रामाणिक तौर पर प्रतिबिम्बित करने में समर्थ हैं और इसीलिए इस संग्रह को सराहा जाएगा।"