Paatiya Prem Ki/पातियां प्रेम की

Rs.225/-

Isbn: 81-903784-2-2

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 2006

" वैयक्तिक संवेदना कैसे वैश्विक संवेदना में बदलती है, रमणिका गुप्ता की ये कविताएं प्रेम को उन्होंने पूरी शिद्दत से जिया है सो ‘उनका कवि’ और ‘उनका प्रेम’ धरती को थोड़ा और चौड़ा करते हैं, थोड़ा और नम।


मैं / जिससे पे्रम करती हूँ/ मैं चाहती हूँ / कि / वह मुक्त रहे / यहां तक कि / मुझसे भी...


हृदय की यह बात इस काव्य-संकलन के संदर्भ में भी बिल्कुल सटीक है... रमणिका गुप्ता का यह काव्य-संकलन स्त्री लेखन के क्रम में एक सार्थक परिणति के रूप में देखने योग्य है। इसमें स्त्री की मुक्त मानसिकता की निःशंक प्रस्तुति, पुरुष वर्चस्व के संदर्भ में भले किसी को असह्य प्रतीत हो, वस्तुतः उससे यह संकेत मिलता है कि संस्कृति पहले से इतनी बदल चुकी है कि फर्क को समझने में कोई कठिनाई नहीं। रमणिका गुप्ता ने इस बुनियादी सत्य को स्वीकार करते हुए प्रेम को इतना महत्त्व दिया है। उनकी कविताओं में जगह-जगह उत्सव का-सा आभास होता है।


ये कविताएं जीवंत संवेदनों से समृद्ध होने के साथ-साथ मनुष्य के मूल अस्तित्व की झंकृति से विभोर करने में सक्षम हैं। इस काव्य-संकलन में भाषा बिल्कुल बातचीत के लहजे में है, गोया किसी से संवाद की स्थिति में प्रस्तुत हो रही है। -नागेश्वर लाल "