Santali bhasha ka vaigyanik adyyan/संताली भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन

Rs.595/-

Isbn: 978-93-81130-74-2

Writer: Prof. Dr. Krshan Chandra tudu/प्रोफ. डॉ कृष्ण चन्द्र टुडू

Year: 2011

"किसी भी भाषा में व्याकरण का बहुत अधिक महत्व होता है और यदि वार्तालाप कर्ता को व्याकरण की प्रकृति और स्वरूप का ठीक ज्ञान नहीं हो तो वह हास्यस्पद हो सकता है किसी भी भाषा की जानकारी तब तक अपूर्ण रहेगी जबतक उस भाषा की व्याकरण के स्वरूपों और गठन का विस्तृत ज्ञान नहीं होता है। भाषा के स्वरूप एवं गठन का विश्लेषण, प्रस्तुत करते हुए भाषा के व्याकरण पर केंद्रित किया गया है। सम्पूर्ण, शोध-प्रबंध को द्वादश अध्याय में बांटा गया है। प्रथम अध्याय में संताली नामकरण, भौगोलिक क्षेत्रा, जनसंख्या, संसार की भाषाएं विषय पर किया गया है। द्वितीय अध्याय से द्वादश अध्याय तक संताली का भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से वर्णविचार, संधिविचार, शब्दविचार, वाक्यविचार, संज्ञा, सर्वनाम, लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल, विशेषण, सजीव एवं निर्जीव, उपसर्ग एवं प्रत्यय, समास एवं अव्यय पर विचार किया गया है। परिशिष्ट में मुहावरे और कहावतें, संताली कुदुम (पहेली), संताली के कुछ लोकगीत एवं लोक कथाएं, पारिभाषिक शब्दावली एवं अन्त में उन सहायक पुस्तकों की सूची है, जिनके अध्ययन से यह कार्य सम्पन्न हो सका है। यह शोध-प्रबंध विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होगा। मुझे विश्वास है कि इस विषय में दिलचस्पी रखनेवाले पाठक शोध-प्रबंध को रोचक, ज्ञानवर्धक और उपयोगी पाएंगे। इस शोध प्रबंध के मूल ऐसी कुछ स्मृतियां जुड़ी है, जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता है।"