Ab Aur Tab/अब और तब

Rs.200/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1985

" राजनीति और कविताई में बड़ी बेमेल मिताई है। ‘अब और तब’ में कवयित्री का दूसरा संग्रह है। ‘गीत-अगीत’ पहला था। पूरी पुस्तक में भाव बरबस ही प्राणों को छू लेते हैं। ठिठक जाना पड़ता है। व्यक्तिगत, सामाजिक एवं सामूहिक जीवन में विद्यमान और अनुभव सब कुछ को रचना के लिए स्वीकार-प्रस्वीकार कर लेना अपने आप में एक बहुत ही बड़े साहस एवं जोखि़म का काम है और यह तब और भी आलक्षणीय हो उठता है जब रचना हिन्दी में की जाए तथा रचनाकार भारतीय पुरुष नहीं महिला हो, मैं इन कविताओं की आलक्ष्णीयता का संज्ञान लेता हूँ | रमणिका जी ने साहसपूर्वक बेझिझक, बेरोक-टोक और बेबाक बातें उन क्षेत्रों की कही हैं, जिन क्षेत्रों को असूर्यम्पश्य कहा गया है। सत्त गतिशील तटस्पर्शी रमणिका की कविताएं कहीं-कहीं अपने आप में अचरज हो उठी हैं, इस अचरज को मैंने भी छुआ है। मैं इसे स्वीकार करता हूं। रमणिका की कुछ कविताएं, इस रक्त की लय को, निर्मिति की कारुकारिता और जिजीविषा को उसी पहाड़ीपन, उसी दारुणता और सच्चाई से उद्धृत करती हैं, इसलिए मैं इस संकलन की कविताओं को मैं प्यार करता हूँ | "