Vigyapan Banta Kavi/विज्ञापन बनता कवि

Rs.150/-

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1996

" रमणिका गुप्ता की ‘विज्ञापन बनता कवि’ से प्रस्तुत संकलन की कविताओं में समकालीन मनुष्य की पीड़ा के साथ-साथ इतिहास के गर्भ से अभिव्यक्त होती हुई मनुष्य की अभिशप्त नियति की विडम्बनाओं को प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त करने की बेचैनी है। इस संकलन की कविताएं न केवल समकालीन जीवन-स्थितियों में बदल रहे मनुष्य की मनःस्थितियों, भाव-बोध और संवेदनाओं की सूचनाएं देती हैं, बल्कि उससे आगे बढ़कर उस बदली हुई मनोदशा में भारत के गांवों के नक्शे में आने वाले ठोस परिवर्तनों की अनिवार्यता की ओर भी एक सार्थक संकेत करती हैं। इस संकलन में केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों की यात्रा के दौरान लिखी गईं उनकी कविताएं कल्पनातीत सौंदर्य और विराटता का एक नया चेहरा उकेरने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय अनुभव के विस्तार का फलक भी समेटे हैं। "