SAMKALIN KAHANIYA/समकालीन कहानियां

Rs.350/-

Isbn: 978-88077-71-7

Writer: Ramnika Gupta/रमणिका गुप्ता

Year: 1989/2012

"‘साहित्य में संवाद की स्थिति समाप्त नहीं होती। बिना किसी संवाद के कोई कहानी नहीं बनती, वह चाहे खुद से ही हो’ निर्मल वर्मा प्रस्तुत कहानी-संग्रह निर्मल वर्मा के कथन को एक मूर्त रूप देता है। उसमें संग्रहीत कहानियां जहां अपने वक्त से संवाद करने को आतुर हैं, वहीं वे आगे बढ़कर भावक के अंतस्तल में विचार भी क्रिएट करने की ताकत रखती हैं। कहानियों के विचारपुंज जहां एक ओर प्रश्नों से मुठभेड़ करते दिखते हैं, तो दूसरी ओर सुधार का विकल्प भी प्रस्तुत करते हैं, जो आज के साहित्य/समाज का सच है और जरूरत भी। इस संग्रह की कहानियां समाज के विभिन्न संदर्भों सरोकारों से जुड़ी हैं। हमारा उद्देश्य रहा है कि समकालीन कहानी के विभिन्न तेवर, रुझान और महत्वपूर्ण पहचान को प्रकट किया जाए, जिससे यह संग्रह समकालीन कहानियांे का प्रतिनिधि-संग्र बन सके। हमने जहां एक ओर वर्गदृष्टि वाली कहानियां संकलित की हैं, तो वहीं मानवीय संबंधों से टूटते हुए आदमी का वजूद, राजनीतिक प्रशासनिक भ्रष्टाचार, औरत की सामाजिक स्थिति, बाल मजदूरों की आकांक्षा, आतंकवाद के खतरे आदि विषयों को रेखांकित करती हुई कहानियों को भी लिया है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस संग्रह की कहानियां कहानी-संसार में अपना एक अलग स्थान बनाती हैं। ‘बेमुरव्वत वक्त’ की जो शिनाख्त इनमें की गई है, वह एक समग्र आदमियत की चिंता है। यही कारण है कि वे प्रभावी हैं, हमें झकझोरने में समर्थ हैं।"