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गतिविधियां एवं उपलब्धियां

रमणिका फाउंडेशन - गतिविधियां एवं उपलब्धियां

सम्मेलन

क) 1997 में बृहत रूप से दलित साहित्य लेखक सम्मेलन, रमणिका फाउंडेशन और विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न किया गया।

ख) 1 जून 2002 को साहित्य अकादमी और रमणिका फाउंडेशन (रफां) के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी लेखक सम्मिलन आयोजित किया गया।

ग) 2 जून को आदिवासी लेखक रमणिका फाउंडेशन के कार्यालय में मिले और उसी दिन ‘अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यिक मंच’ (अभासम) जिसका अंग्रेज़ी में ।सस प्दकपं ज्तपइंस स्पजमतंतल थ्वतनउ ;।प्ज्स्थ्द्ध नाम रखा गया, का गठन हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर एक एडहॉक कमिटी बनी जिसके अध्यक्ष व सचिव क्रमशः रामदयाल मुंडा (पूर्व कुलपति रांची वि.वि.µकवि एवं लेखक) व वाहरू सोनवणे (महाराष्ट्र के आदिवासी कवि) मनोनीत हुए। यह भी निर्णय लिया गया कि अखिल भारतीय साहित्यिक मंच को रमणिका फाउंडेशन को-आर्डिनेट करेगी। रमणिका गुप्ता (कथाकार, कवि एवं पत्राकार), फाउंडेशन की तरफ से को-आर्डिनेशन का यह कार्य सम्पन्न करेंगी। मंच का नेतृत्व केवल आदिवासी ही करेंगे। मंच ने आदिवासी लेखकों के दिशा निर्देश के लिए ग्यारह सूत्राय एजेंडा घोषित किया ।

घ) 31 अगस्त 2002 को विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों का राष्ट्रीय स्तर पर रमणिका फाउण्डेशन द्वारा अ. भा. विमुक्त एवं घुमंतु जनजाति एसोसिएशन तथा फाईन आर्ट अकादमी के साथ संयुक्त रूप से स्वर्ण जयन्ती समारोह सम्पन्न हुआ।

ङ) सितम्बर, 2002 को मुम्बई में हुई अपनी केन्द्रीय कार्याकारणी की बैठक में अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यिक मंच (अभासम) ने देश में आठ आदिवासी क्षेत्रों का गठन किया, और हर क्षेत्रा में सम्मेलन करने का निर्णय लिया।

च) पूर्वोत्तर राज्यों का प्रथम क्षेत्राय सम्मेलन 21 दिसम्बर, 2002 को गोहाटी में हुआ।

छ) दक्षि़ण राज्यों का प्रथम क्षेत्राय सम्मेलन 18-19 जनवरी 2003 को कन्नड़ यूनिवर्सिटी तथा रमणिका फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विजयनगर हरपी (कर्नाटक) में हुआ।

ज) 9, 10 जून 2004 को रमणिका फाउंडेशन के तत्वाधान में अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यक मंच (अभासम) के पूर्वी राज्यों का क्षेत्राय सम्मेलन थयोलोजिकल हॉल, रांची में सम्पन्न हुआ।

लोकार्पण

  • 1997 में ‘दूसरी दुनिया का यथार्थ’ का लोकार्पण
  • 1998 में ‘दलित चेतना : सोच’ का लोकार्पण
  • 2001 में ‘पंजाबी साहित्य में दलित कदम’ का लोकार्पण
  • 2002 में ‘आदिवासी स्वर और नई शताब्दी’ पुस्तक का लोकार्पण
  • 2002 में ‘भीड़ सतर में चलने लगी है’ का लोकार्पण
  • 2002 में ‘आदिवासी स्वर और नई शताब्दी’ खंड-1 पत्रिका का लोकार्पण
  • 2002 में ‘पंजाबी साहित्य में दलित कदम’ पुस्तक का लोकार्पण
  • 2003, को रमणिका गुप्ता के उपन्यास ‘मौसी’ के सुश्री सोमा सबलोक द्वारा किए गए पंजाबी अनुवाद की पुस्तक ‘मासी’ का लोकार्पण प्रसिद्ध नाटककार चरणदास सिद्धू द्वारा राजेन्द्र भवन नई दिल्ली में किया गया ।
  • 2004 को संथाली आदिवासी कवियत्रा निर्मला पुतुल के द्विभाषी (संताली-हिन्दी) कविता-संग्रह ‘अपने घर की तलाश में’ का लोकार्पण डॉ. के. एम. मित्रा द्वारा अखिल भारतीय आदिवासी साहित्यक मंच ;।प्ज्स्थ्द्ध के पूर्वी राज्य सम्मेलन में रांची के थयोसोफिकल हॉल किया गया।

सम्मान

  • रमणिका फाउंडेशन द्वारा द्विवार्षिक अंतराल पर दलित/आदिवासी-विमर्श, स्त्रा-विमर्श, साम्प्रदायिक सद्भाव एवं जनवादी-विमर्श तथा हिन्दीतर लेखकों द्वारा हिन्दी भाषा में प्रगतिशील रचना या राष्ट्रीय भाषाओं की एकजुटता हेतु अनुवाद के लिए लेखन की विभिन्न विधाओं पर चार साहित्यकारों को सम्मान देना तय पाया गया जिसका ब्योरा नीचे है
  • मार्च 2000 में रमणिका फाउंडेशन सम्मान-एक, 1999 दिया गया।
  • 12 दिसम्बर, 2003, को राजेन्द्र भवन, नई दिल्ली में, पत्राकारिता पर चार सम्पादकों/पत्राकारों को रमणिका फाउंडेशन सम्मान-दो, 2001 दिया गया।