एक परिचय

युद्धरत आम आदमी का त्रैमासिक रूप में 1987 से ही प्रकाशन किया जा रहा है। आदिवासी, दलित, महिला, सांप्रदायिक सद्भाव, जनवादी आंदोलन तथा शोध के क्षेत्र में यह पत्रिका कार्य करती है। यह हिन्दी की सम्मानित पत्रिका मानी जाती है। इसके माध्यम से आदिवासी, दलित व महिला लेखकों की उत्कृष्ट रचनाओं को प्रकाशित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह पत्रिका देश में आदिवासियों, दलितों व महिलाओं की स्थिति का एक आइना प्रस्तुत करती है।

 

युद्धरत आम आदमी के विशेषांक