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सेवा में,      युद्धरत आम आदमी

निबंधन -
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विषय: ‘युद्धरत आम आदमी’ में विज्ञापन देने के संबंध में।

महोदय,

‘युद्धरत आम आदमी’ जनसाहित्य की दस्तावेजी मासिक पत्रिका है। इस पत्रिका के वर्ष में 12 साधारण अंक नियमित रुप से प्रकाशित किये जाने के अतिरिक्त अब तक कई विशेषांक भी निकाले जा चुके हैं। विभिन्न प्रादेशिक, आदिवासी व जनभाषाओं के रचनाकारों की कृतियों के हिन्दी अनुवादों पर आधारित कई अंक भी प्रकाशित किये जा चुके हैं जो देश भर में चर्चित हुए है और वंचित (सब-अल्टर्न) वर्गों, दलित, आदिवासी, स्त्री विमर्श के साहित्य को राष्ट्रीय पैमाने पर आन्दोलन के रुप में प्रस्तुत करने का माध्यम बने हैं। इस प्रकार इस पत्रिका के माध्यम से पाठकों को देश की विभिन्न संस्कृतियों व भाषाओं के साहित्य से जोड़ने हेतु एक सेतु का काम भी संपन्न हुआ है। आपसे नम्र निवेदन है कि पत्रिका के आगामी अंक में अपनी फर्म/प्रतिष्ठान का विज्ञापन देकर आप अपने प्रतिष्ठान का प्रचार करके लाभान्वित हों तथा पत्रिका के माध्यम से सब-आल्टर्न वर्गों कि जागृति के निमित्त सहयोगी भी बनें। पत्रिका भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं प्रतिष्ठानों के साथ-साथ देश भर के पाठकों में भी पढ़ी जाती है।

भवदीय

रमणिका गुप्ता
संपादक

विज्ञापन दर
रंगीन कवर का अंतिम पृष्ठ - 30,000/-
रंगीन कवर भीतरी तृतीय पृष्ठ - 30,000/-
रंगीन कवर हाफ भीतरी तृतीय पृष्ठ - 15,000/-

रंगीन कवर भीतरी द्वितीय पृष्ठ - 30,000/-
रंगीन कवर हाफ भीतरी द्वितीय पृष्ठ - 15,000/-

श्याम श्वेत भीतरी आर्ट पेपर फुल साइज पृष्ठ - 20,000/-
श्याम श्वेत भीतरी, पेपर हाफ साइज - 10,000/-
श्याम श्वेत भीतर, पेपर हाफ साइज - 5,000/- कृपया विज्ञापन राशि चेक व ड्राफ्ट द्वारा युद्धरत आम आदमी के नाम से भेजें।

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