दलित साहित्यकार सम्मान

रमणिका फाऊंडेशन हज़ारीबाग, इस्ट एंड वेस्ट अकादमी पटना, अनुसूचित जाति-जनजाति
कर्मचारी संघ बिहार पटना, आंबेडकर मिशन चितकोहरा, पटना द्वारा दलित साहित्यकार

 

ऊपरवर्नित चार संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक १२.०३.२००० को भारतीय नृत्यकला मंदिर पटना में आयोजित समारोह में चार दलित साहित्यकार सम्मानित किए गए. यह बिहार राज्य के साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों द्वारा की गई सुखद शुरुआत है. समारोह कि अध्यक्षता सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठीत साहित्यकार मान्यवर माताप्रसाद जी पूर्व राज्यपाल अरुणाचल प्रदेश ने की. श्रीमती रमणिका गुप्त, अध्यक्ष रमणिका फाऊंडेशन हजारीबाग ने अतिथी साहित्यकारों का परिचय कराया. प्रो. डा० रमाशंकर आर्य, कुलपति वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय तथा संपादक आंबेडकर मिशन पत्रिका ने समारोह के स्वागत अध्यक्ष की हैसियत से अतिथियों का स्वागत किया. श्री आर० सी० कैथल आई० जी०, अध्यक्ष अनु० जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने समारोह के स्वागत सचिव की हैसियत से अतिथियों को बिहार राज्य में दलित साहित्य आन्दोलन से अवगत कराया. समारोह का संचालन बुद्ध शरण हंस, संस्थापक अध्यक्ष अम्बेडकर मिशन, चितकोहरा पटना ने की.


इस सम्मान समारोह में साहित्यकार प्रो० जिया लाल आर्य, मा० ग्रेस कुजुर, निदेशक आकाशवाणी, पटना, मा० ममता कालिया, कौशल्या वैशयन्मी, प्रह्लाद चंद्र दास, मा० फूलचंद गुप्त, मा० मनेजर पाण्डेय, प्रो० विनय कंठ, प्रो० रामधारी सिंह दिवाकर, प्रो० नागेश्वर लाल, बाबू लाल मधुकर मगही भाषा के सुविख्यात कवि, प्रेम कुमार मणि – सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा० आर० आर० कन्नोजिया, डा० महावीर प्रसाद, प्रांतीय अध्यक्ष भारतीय दलित साहित्य अकादमी, मा० अमीरचंद दास पूर्व न्यायमूर्ति उच्च न्यायलय पटना ने भाग लिया.


" आज के सम्मान समारोह में विरसा पुरस्कार प्रह्लाद चंद्र दास को उनकी कृती “पुटुस के फूल” के लिए. सावित्री बाई फुले पुरस्कार श्रीमती ममता कालिया को उनकी कृती “बोलने वाली औरत’’ के लिए. शफदर हाश्मी पुरस्कार प्रो० फूलचंद गुप्त जी को उनकी कृती “इसी माहौल में’’ के लिए. तथा कामिल बुल्के पुरस्कार श्रीमी कौशल्या वैश्यंत्री. उनकी कृति दोहरा अभिशाप (आत्मकथा ) के लिए प्रदान किया गया . पुरस्कार में ५०००/-रु० नगद, प्रतिक चिन्ह, मानपत्र प्रत्येक पुरस्कृत साहित्यकारों को प्रदान किया गया. "


समारोह के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार माता प्रसाद जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में दलित साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महामना ज्योति राव फुले और बाबा साहब अम्बेडकर के सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन से दलित साहित्य का जन्मा हुआ है. वरना इसके पूर्व हिंदी साहित्य में दलित साहित्य को न जगह थी न दलित संवेदना को. दलित साहित्य में दलितों का जीवन, दर्शन, मिशन सबकुछ व्यक्त हो रहा है.


समारोह के स्वागताध्यक्ष, प्रो० डा० रमाशंकर आर्य कुलपति कुंवर सिंह विश्वविद्यालत आरा ने दलित साहित्यकारों को अत्यंत परिश्रमपूर्वक गंभीर अध्ययन कर साहित्य सृजन करने का आह्वान किया. स्वागत सचिव आर० सी० कैथल आई० जी० पुलिस ने दलित साहित्य को समाज का दर्शन, दिग्दर्शन और मशाल कहा जो दबे कुचले समाज को रास्ता दिखता हो. ममता कालिया, कौशल्या वैश्यन्मी, प्रह्लाद चंद्र दास और प्रो० फूलचंद गुप्त ने भी पुरस्कार प्राप्त कर अपने –अपने उदगार व्यक्त किए.


समारोह के उद्घाटन भाषण में माननीय माता प्रसाद जी ने दलितों के उत्थान के लिए दलितों तथा गैर दलितों के लिए किए जा रहे कार्यों में अंतर की बारीकियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि दलितों को अपने हर क्षेत्र में स्वयं का उत्थान करना होगा. साहित्यकार राजेंद्र यादव, जिया लाल आर्य, मैनेजर पाण्डेय. श्रीमती ग्रेस कुजूर, विभांशु दिव्याल, प्रो० नागेश्वर लाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए. रमणिका फाऊंडेशन कि अध्यक्ष रमणिका गुप्त ने धन्यवाद ज्ञापन किया.


साभार : अम्बेडकर मिशन पत्रिका (मई –जून) २०००