इस सोच के पीछे कौन ?

युद्धरत आम आदमी की स्थापना समर्पित समाज सुधारक, एवं चर्चित कवि, साहित्यकार एवं पत्रकार रमणिका गुप्ता ने की है। वे आदिवासियों, दलितों, स्त्रियों और अल्पसंख्यकों के लिए एक बेहतर ज़िन्दगी की मुहिम में पिछले 54 वर्षों से संघर्षरत हैं। रमणिका जी ने इन तबकों का प्रतिनिधित्व बिहार राज्य विधानसभा व विधान परिषद में भी किया है। उनकी छवि एक जुझारू महिला नेता के रूप में रही है।